हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने कहा, ”रूस के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ के प्रतिबंध ख़ुदकुशी करने के समान हैं”

हंगरी

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस के ख़िलाफ़ पश्चिमी देश लगातार प्रतिबंधों के नए नए पैकेजों का एलान कर रहे हैं। अब यूरोपीय संघ ने रूस के लिए सोने के निर्यात पर पाबंदी लगा दी है।

यूरोपीय देशों ने अमरीका के साथ मिलकर रूस पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव डालने का भरपूर प्रयास किया है और दूसरी ओर यूक्रेन को नई नस्ल के हथियारों से लैस किया है। यूरोपीय संघ रूस के ख़िलाफ़ अब तक प्रतिबंधों के 6 पैकेजों का एलान कर चुका है। हाल ही में यूरोपी संघ ने रूस से 2022 के अंत तक 90 फ़ीसदी तेल के आयात में कटौती का एलान किया था। लेकिन रूस के साथ सोने के व्यापार पर प्रतिबंधों का एलान ऐसी स्थिति में किया गया है कि जब यूरोपीय देशों के ख़ुद आर्थिक मद्दी का सामना है। यूरोपीय देश ईंधन की कमी और बढ़ती मंहगाई से जूझ रहे हैं। रूस ने भी यूरोप के लिए गैस की आपूर्ति में भारी कटौती कर दी है, जिसके कारण सर्दियों में इन देशों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

हंगरी के प्रधान मंत्री विक्टर ओर्बन ने मास्को के ख़िलाफ़ यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों को ग़लत बताया है और इस संघ से इन प्रतिबंधों को रद्द करने का आह्वान किया है। ओर्बन का कहना था कि यूरोपीय संघ ने यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से रूस के खिलाफ़ कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। लेकिन इन प्रतिबंधों का ख़ुद यूरोपीय देशों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। दर असल, रूस के खिलाफ़ यूरोपीय प्रतिबंध ख़ुदकुशी करने के समान हैं।

पश्चिम की प्रतिबंधों की नीति अब पहले से भी ज़्यादा असफल हो गई है, क्योंकि इन प्रतिबंधों का ख़ुद प्रतिबंध लगाने वाले देशों पर गहरा असर पड़ रहा है और वह आर्थिक संकट की दलदल में धंसते जा रहे हैं। इसका एक असर यह हुआ कि पिछले 21 वर्षों में पहली बार डॉलर ने यूरो को पछाड़ दिया है। दूसरी ओर रूस पर इन प्रतिबंधों का वैसा असर नहीं पड़ रहा है जैसा अनुमान था, बल्कि रूस ने कुछ इस तरह से प्रबंधन किया है कि उसकी आय घटने के बजाए बढ़ रही है। आईएईए ने अपनी हालिया रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि जून में रूस ने 20 अरब डॉलर का तेल निर्यात किया है। इसके बावजूद, यूरोपीय संघ अब रूस पर सोने के व्यापार का प्रतिबंध लगाने जा रहा है। रूस विश्व में सोने के कुल उत्पादन का 8.5 फ़ीसदी उत्पाद करता है। चीन और ऑस्ट्रेलिया के बाद वह विश्व में सोने का सबसे ज़्यादा उत्पाद करने वाला तीसरा देश है। 2021 में रूस ने 15 अरब डॉलर का सोना निर्यात किया था।

इसलिए कहा जा सकता है कि रूस के ख़िलाफ़ पश्चिमी देश अब जितने भी प्रतिबंध लगा रहे हैं, वे सिर्फ़ सिंबॉलिक हैं और धरातल पर उनका कोई असर नहीं है।

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